हरदा ने क्यों कहा…हां आंशिक रूप से हूं मैं ‘उज्याड़ू बल्द’

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर पुराने फैसलों की चर्चा हो रही है। कांग्रेस छोड़ने वाले जिन नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उज्याडू़ बल्द कहा था। आज वही नेता उनको उनके बयानों के जरिए घेरने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा ही एक बयान कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल जो अब भाजपा में है, ने भी दिया है। उनके बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उनको आज लगता है कि उन्होंने 2012 में जो फैसला लिया था, उसके अनुसार वे खुद को आंशिक रूप से उज्याडू़ बल्द स्वीकार करते हैं।

2012 का फैसला और बदले समीकरण

दरअसल, वर्ष 2012 में जब कांग्रेस सरकार के गठन के दौरान मंत्रिमंडल पर मंथन चल रहा था, तब पिथौरागढ़ से विधायक मयूख महर का नाम प्रमुख दावेदारों में था। हालांकि, उस समय पार्टी के भीतर हुए सुझाव के आधार पर समीकरण बदले गए। मयूख महर को योजना आयोग का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने और उनकी जगह दिनेश अग्रवाल को कैबिनेट में शामिल करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

‘उज्याड़ू बल्द’ टिप्पणी और आत्मस्वीकार

हालिया बयान में ‘उज्याड़ू बल्द’ कहे जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत नेता ने उस फैसले को आंशिक रूप से अपनी भूल माना है। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय लिया गया निर्णय अब राजनीतिक रूप से अलग नजर आता है और उसके दूरगामी परिणाम सामने आए हैं।

 बदला राजनीतिक ठिकाना

इस फैसले के असर तब स्पष्ट हुए, जब दिनेश अग्रवाल ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया, जिससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बने।

क्षेत्रीय और संगठनात्मक प्रभाव

इस निर्णय का असर पिथौरागढ़ में भी देखने को मिला, जहां संगठनात्मक संतुलन प्रभावित हुआ। साथ ही स्थानीय स्तर पर भी गुटबाजी बढ़ने की बात सामने आई।

सियासी तंज और वर्तमान परिदृश्य

हरीश रावत ने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि उनके कुछ पुराने साथी अब भाजपा में प्रासंगिक भूमिका में हैं और समय-समय पर राजनीतिक बयानबाजी में उनका उपयोग किया जाता है।

दिनेश अग्रवाल ने क्यों छोड़ी कॉंग्रेस

साथ ही पूर्व सीएम हरीश रावत ने मोथरोवाला का भी जिक्र किया है। दरअसल, मोथरोवाला में दिनेश अग्रवाल की प्रॉपर्टी है। जिनमें कुछ सरकारी जमीनों पर कब्जा कर बनाई बताई जाती हैं। इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी रहे, जिन पर कार्रवाई के डर से उन्होंने कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्वाइन कर ली थी।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

पोखड़ा क्षेत्र में गुलदार के आतंक से निपटने को वन विभाग सख्त, पकड़ने और आवश्यकता पड़ने पर मारने की अनुमति

Sat Apr 4 , 2026
पौड़ी : विकासखंड पोखड़ा क्षेत्र में बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने त्वरित एवं कड़े कदम उठाए हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा जनसुरक्षा, विशेष रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संबंधित  क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को पकड़ने के […]

You May Like

Share
error: Content is protected !!