सिमली बेस अस्पताल की मांग को लेकर महापंचायत

15 अगस्त तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा बड़ा आंदोलन, बेस नहीं तो वोट नहीं का ऐलान

कर्णप्रयाग (चमोली)। सिमली बेस अस्पताल की मूलभूत सुविधाओं को लेकर गुरूवार को बेस अस्पताल संघर्ष समिति के बैनर तले महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत के माध्यम से चेतावनी दी गई कि यदि 15 अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन किया जाएगा। साथ ही बेस नहीं तो वोट नहीं अभियान भी चलाया जाएगा।

सिमली में मनीष डिमरी की अध्यक्षता में आयोजित महापंचायत में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, महिला मंगल दलों, युवा मंगल दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। महापंचायत में अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और सरकार की ओर से अब तक कार्रवाई नहीं होने पर लोगों ने गहरा रोष व्यक्त किया। कहा कि सिमली महिला बेस अस्पताल पूरे मध्य हिमालयी क्षेत्र की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों और संसाधनों की कमी के कारण यह अपनी मूल भूमिका निभाने में असमर्थ साबित हो रहा है। इसका सबसे अधिक खामियाजा दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

बेस अस्पताल संघर्ष समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नेगी ने कहा कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भराड़ीसैंण विधानसभा सत्र के दौरान सिमली महिला बेस अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। उस समय क्षेत्र की जनता को उम्मीद जगी थी कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति होगी, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। लेकिन घोषणा के लंबे समय बाद भी धरातल पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसके कारण गंभीर मरीजों को श्रीनगर, ऋषिकेश और देहरादून जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। कई बार समय पर उपचार न मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक तथा मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

जिला पंचायत अध्यक्ष विक्रम कठैत ने कहा कि सिमली बेस अस्पताल की मांग कोई नई नहीं है। क्षेत्र की जनता लंबे समय से अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए तत्काल प्रभाव से अस्पताल में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
महापंचायत में मौजूद ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार ने अब भी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। कहा कि स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना उनका अधिकार है।

महापंचायत में मौजूद कर्णपप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल ने आंदोलनकारियों और जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और अस्पताल की मांगों को लेकर सकारात्मक आश्वासन दिया। हालांकि जब उन्होंने मांगों के समाधान के लिए तीन माह का समय मांगा तो महापंचायत में मौजूद लोगों ने इस पर असहमति जताई। लोगों का कहना था कि घोषणा को हुए पहले ही डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और अब और इंतजार स्वीकार्य नहीं होगा। जनप्रतिनिधियों और संघर्ष समिति के साथ हुई चर्चा में विधायक ने आश्वासन दिया कि 15 अगस्त अथवा उससे पहले महिला बेस अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल बनाने संबंधी शासनादेश की प्रति उपलब्ध कराने तथा अस्पताल में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कराने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।

महापंचायत में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि तय समय सीमा तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में बेस नहीं तो वोट नहीं अभियान चलाया जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा। लोगों ने स्पष्ट कहा कि आगामी चुनावों में स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा प्रमुख चुनावी मुद्दा रहेगा।

इस दौरान महापंचायत में प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष उमेश खंडूड़ी, यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी, राजेंद्र सगोई, विशोदा देवी, शकुंतला देवी, जानकी देवी, कमला देवी आदि मौजूद रहे।

 

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