भाजपा-कांग्रेस की जंग में तीसरा कोण, यूकेडी-स्वाभिमान मोर्चा बन सकते हैं किंगमेकर

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव का सियासी रण अभी दूर है, लेकिन सत्ता का गणित अभी से करवट लेने लगा है। पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़े भाजपा और कांग्रेस के बीच बदलते समीकरण की तस्वीर पेश करते हैं। वहीं इस बार उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) और स्वाभिमान मोर्चा जैसे क्षेत्रीय दल मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं। यदि ये दल कुछ सीटों पर मजबूत पकड़ बनाने में सफल रहे तो भाजपा और कांग्रेस के बीच होने वाली सीधी लड़ाई का गणित बिगड़ सकता है और त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में छोटे दल किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं।

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 57 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता पर एकतरफा कब्जा किया था। उस समय पार्टी का वोट शेयर करीब 46.5 प्रतिशत रहा था। लेकिन 2022 में भाजपा की सीटें घटकर 47 रह गईं और वोट शेयर भी करीब 44 प्रतिशत पर आ गया। यानी पांच साल में पार्टी को 10 सीटों का नुकसान हुआ और उसके वोट प्रतिशत में भी गिरावट आई।

इसके उलट कांग्रेस ने 2017 के मुकाबले 2022 में उल्लेखनीय वापसी की। 2017 में पार्टी महज 11 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि 2022 में उसने 19 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की। कांग्रेस का वोट शेयर भी करीब 33.5 प्रतिशत से बढ़कर 37 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि भाजपा और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर जरूर बना हुआ है, लेकिन सीटों के स्तर पर मुकाबला अपेक्षाकृत करीब आया है।

2027 में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2022 में जीती 47 सीटों को बचाए रखने की होगी। सरकार के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी, कुछ विधायकों के प्रति असंतोष, टिकट को लेकर संभावित दावेदारी और संगठन के भीतर खींचतान कई सीटों पर पार्टी का समीकरण प्रभावित कर सकती है। हालांकि भाजपा को कमजोर मानना अभी जल्दबाजी होगी। उसका मजबूत संगठन, बूथ स्तर तक नेटवर्क और परंपरागत मतदाता आधार उसे मुकाबले में बढ़त देता है। इसके अलावा सरकार के स्तर पर किए जा रहे विकास कार्य और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सक्रियता भी भाजपा के चुनावी अभियान का आधार बन सकती है।

कांग्रेस के लिए 2027 का चुनाव सत्ता में वापसी का बड़ा अवसर है। 2022 में सीटों और वोट शेयर दोनों में बढ़त हासिल करने के बाद पार्टी यदि अपने आधार को और मजबूत करती है तो भाजपा के खिलाफ सीधी चुनौती खड़ी कर सकती है। लेकिन कांग्रेस की राह आसान नहीं है। पार्टी के भीतर नेतृत्व और गुटों के बीच खींचतान का असर टिकट वितरण और चुनावी रणनीति पर पड़ा तो भाजपा विरोधी माहौल का फायदा कांग्रेस को नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाकर चुनाव तक संगठन को एकजुट रखने की होगी।

2027 के चुनाव में यूकेडी और स्वाभिमान मोर्चा की सक्रियता सबसे महत्वपूर्ण बदलाव हो सकती है। राज्य में क्षेत्रीय अस्मिता, मूल निवास, भू-कानून, रोजगार, पलायन और पहाड़ से जुड़े मुद्दों को लेकर इन दलों के पास भाजपा और कांग्रेस से अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने का अवसर है। इन दलों का प्रभाव यदि सीमित सीटों तक भी मजबूत रहता है तो वे जीत भले कम सीटों पर दर्ज करें, लेकिन भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के वोट काटकर कई सीटों का परिणाम प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों की करीबी सीटों पर कुछ हजार वोटों का अंतर भी चुनावी परिणाम को पलट सकता है।

उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं और बहुमत के लिए 36 विधायक जरूरी हैं। ऐसे में यदि भाजपा और कांग्रेस में से कोई भी दल बहुमत से दूर रह जाता है तो छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका अचानक बढ़ जाएगी। यही वह स्थिति होगी, जहां यूकेडी और स्वाभिमान मोर्चा जैसे दल ‘किंगमेकर’ बन सकते हैं। यदि क्षेत्रीय दल पांच से सात सीटों पर प्रभावी प्रदर्शन करते हैं और भाजपा-कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर कम रहता है तो सरकार बनाने के लिए इन दलों का समर्थन निर्णायक हो सकता है।

हालांकि अभी चुनाव में समय है और राजनीतिक परिस्थितियां कई बार तेजी से बदलती हैं। भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए संगठन और सरकार के प्रदर्शन पर दांव लगाएगी, जबकि कांग्रेस सत्ता विरोधी रुझान को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी। इसी बीच क्षेत्रीय दल यदि अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में मजबूत जमीन तैयार कर लेते हैं तो 2027 का मुकाबला केवल भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रह जाएगा।

ऐसे में असली सवाल यह नहीं होगा कि भाजपा और कांग्रेस में कौन सबसे ज्यादा सीटें जीतता है, बल्कि यह होगा कि बहुमत से दूर रहने की स्थिति में सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाती है।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सार्वजनिक स्थल पर हुड़दंग करने वालों पर श्रीनगर पुलिस का शिकंजा, 15 हिरासत में

Sat Aug 29 , 2026
श्रीनगर : वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार द्वारा जनपद में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने, सार्वजनिक स्थलों पर शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने तथा असामाजिक एवं संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु समस्त थाना प्रभारियों को नियमित रूप से अभियान चलाकर आवश्यक वैधानिक […]

You May Like

Share
error: Content is protected !!